Sunday, 6 April 2014

"भारतीय राजनीती में फिल्मी सितारें "


भारतीय राजनीती में ग्लेमर का तड़का हमेशा से लगता रहा है। पहले यह प्रविर्ती कम थी ,दक्षिण की राजनीती की  बात करें तो वहा यह हमेशा प्रभावशाली रहे हैं,लेकिन कुछ चुनावों से पूरे भारतीय राजनीती परिदृश्य में राजनेताओं का दखल बढ़ता जा रहा है। सोलहवीं लोकसभा के लिए कई सितारें चुनाव मैदान में उतरें हैं ,लगभग सभी पार्टियों ने सितारों पर जमकर दावं खेला है। ग्लेमर की वजह से ही कई बार विपक्ष के मजबूत उम्मीदवार को हरा चुके हैं ,इसकी मिसाल अमिताभ बच्चन और गोविंदा हैं। 

कांग्रेस ने राज बब्बर को गाजियाबाद ,नगमा को मेरठ ,रविकिशन को जौनपुर से टिकट दिया है। भारतीय जनता पार्टी ने हेमा मालिनी को मथुरा ,किरण खेर को चंडीग़ढ़ ,परेश रावल को गुजरात ,तो मनोज तिवारी को दिल्ली से
उम्मीदवार बनाया हैं। वही आम आदमी पार्टी ने चंडीगढ़ से गुल पनाग को तो लखनऊ से जावेद जाफरी को मैदान में उतारा है। 

पार्टी नेताओं का कहना है कि फ़िल्मी सितारों के आने से कार्यकर्ताओं में जोश भरता है। समाज के लोगं उन्हें खुद से जोड़ पाते हैं ,लेकिन कई बार सितारें लोगों कि उम्मीदों पर खड़े नहीं उतर पाते हैं ,और वापस अपनी दुनिया में लौट जाते हैं।इस बार के लोकसभा चुनावों में जमकर सितारों को सीटें दी गयी हैं ,कई बार देखा गया है ,कि फ़िल्मी सितारों को ऐसी जगह से टिकट दिया जाता है ,जहां से पार्टियों के पास कोई बेहतर उम्मीदवार नहीं होते हैं। मथुरा से हेमा मालिनी और मेरठ से नगमा इसके उदाहरण हैं ,यही वजह है कि चंडीगढ़ से भाजपा उम्मीदवार किरण खेर का क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं ने ही विरोध किया था। राज बब्बर और जनरल वीके सिंह पर भी बाहरी उम्मीदवार होने कि वजह से गाज़ियाबाद में परेशानियों का सामना करना पड़ा है। 

2004 के चुनाव में धर्मेन्द्र बीकानेर से भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतें। गोविंदा ने कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर उत्तर मुम्बई के लोकसभा सीट से भाजपा के राम नाईक को हराया था। लेकिन जीत के बाद दोनों अभिनेताओं ने अपने क्षेत्र की  जनता को अपना चेहरा तक नहीं दिखाया था ,जिसे लेकर वहा के क्षेत्रीय लोगों में काफी गुस्सा था। बीकानेर और मुम्बई के लोगों ने तो धर्मेन्द्र और गोविंदा की  गुमशुदगी के पोस्टर तक क्षेत्र में लगा दिए थे। 

अब देखना दिलचस्प होगा कि सोलहवीं लोकसभा में कितने सीतारे संसद तक पहुँच कर जनता कि सेवा करते हैं या वह भी और सितारों कि तरह जनता को मुर्ख ही बनाते रहेंगे। 

::::::::: सुगंधा झा 

1 comment:

  1. आपकी इस अभिव्यक्ति की चर्चा कल रविवार (13-04-2014) को ''जागरूक हैं, फिर इतना ज़ुल्म क्यों ?'' (चर्चा मंच-1581) पर भी होगी!
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    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर…

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