Wednesday, 9 October 2013

''मोदी युग की शुरुआत''


भारतीय जनता पार्टी ने नरेंद्र मोदी को 2014 के लोकसभा चुनावों के लिए प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया। एक दौर था,जब भाजपा में अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृषण आडवानी की तूती बोलती थी ,आज अटल जी बीमारी के चलते सक्रिय राजनीति से संन्यास ले चुके हैं ,वहीं अडवानी सक्रिय होने के बावजूद पार्टी में हाशिये पर पहुँच चुके हैं। भाजपा के लौह पुरुष कहलाने वाले अडवानी मोदी के बढ़ते कद से खुश नहीं हैं। जब मोदी को प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी की घोषणा राजनाथ सिंह ने की ,तब उस बैठक में अडवानी शामिल नहीं थे ,बल्कि उन्होंने नाराजगी भरी चिठ्ठी जरुर भेज दी। कुछ लोग मानते हैं कि मोदी वह सपना देख रहे है ,जो कभी पूरा नहीं होगा क्योंकि पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मानते हैं कि, मोदी का एजेंडा पूरे भारत में लागू नहीं हो पाएगा। सच जो भी हों लेकिन वोटों की राजनीती में पिसती आम जनता है। अब देखना यह है कि क्या अकेले मोदी के दम पर भारतीय जनता पार्टी अपना 2014 का मिशन पूरा कर पाती है या नहीं। आजकल पूरा मीडिया मोदी पर मेहरबान है ,लेकिन जिस तरह से मोदी को लेकर हर तरफ अतिरंजना दिखाई देती है ,उससे शक होता है कि कही मोदी का हश्र भी अन्ना हजारे और अरविन्द केजरीवाल जैसा न हो जाए। रणनीति चाहे विधानसभा चुनावों की हो या लोकसभा के मिशन 2014 की केंद्र में नरेंद्र मोदी ही होंगे। राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ व भाजपा के नेताओं के एक वर्ग को पूरा भरोसा है की मोदी पर लगाए गए दांव से विधानसभा चुनाव में भी उसे सफलता मिलेगी और लोकसभा में न या रिकॉर्ड बनेगा। मोदी के साथ भाजपा की रणनीति साफ है ,मोदी अपने हिन्दुत्वादी चेहरे से कांग्रेस के भ्रष्टाचार व कुशासन पर भी हल्ला बोलेंगे। मोदी का लक्ष्य 18 से 35 साल का युवा मतदाता है। गुजरात के विकास की कहानियां सुनकर यूपीए सरकार के पिछले चार सालों के कार्यकाल से त्रस्त मध्य व युवा वर्ग मानने लगा है की केवल मोदी ही देश की कायापलट कर  सकते हैं। अब देखना है की अटल, अडवानी से मोदी युग में पहुचीं भाजपा किस तरह की राजनीती करती हैं।
--सुगंधा झा 

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